Kid story in hindi | Guruji की सीख stories for kid in hindi

आज यह कहानी जो है। बहुत ही अच्छी kid story है। यह story kids के लिए है और यह Hindi short story with moral for kid के लिए है। kid story in hindi
A hindi kids stories to entertain the kid and people.
शुरू करते है moral stories for childrens in hindi.

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Kid story in hindi



गुरुजी की सीख | Hindi kids stories(Moral stories in hindi)

A good kid story in hindi | start kid story

बहुत पुरानी बात है कुछ साल पहले एक बार आश्रम था। जहां पर बच्चे शिक्षा प्राप्त करने के लिए आया करते थे। उन्हें दोनों में से थे।
 मोहन और कमल उनकी शिक्षा पूरी हो चुकी थी और आश्रम के शिक्षा पूरी करने के बाद अपने-अपने घर जाना था। जब मोहन और कमल अपने घर जा रहे थे। 
तब उनके गुरु जी ने उन्हें बुलाया और  आज तुम्हारी शिक्षा पूरी हो चुकी है। घर जाने से पहले तुम्हें एक और परीक्षा देनी होगी। 
अगर तुम इस परीक्षा में सफल हो जाते हो तभी तुम्हें घर जाने दिया जाएगा और अगर तुम परीक्षा में असफल हो तो तुम्हें यही पर रुकना होगा।

Kid story in hindi | Hindi short stories | Moral stories in hindi

"तभी मोहन गुरुजी से पूछता है"
गुरुजी कैसी परीक्षा हमने अपनी शिक्षा पूरी कर ली है। आज तो हमें घर भी जाना है तो हमें कौन सी परीक्षा देनी है।
गुरुजी बोले तुम्हें मेरा छोटा सा काम करना होगा अगर तुम मेरा काम कर दोगे तो तुम इस परीक्षा में सफल हो जाओगे और घर जा पाओगे।
"तभी मोहन गुरुजी से कहता है"
 बताइए गुरुजी आपका जैसा भी काम होगा हम कर देंगे। तब गुरुजी मुस्कुराए और गुरुजी ने कहा बेटा मैं तुम दोनों को कबूतर दे रहा हूं। तुम दोनों ने इस कबूतर को मारना है। लेकिन एक बात का ध्यान रखना कि कोई तुम्हें कबूतरों को मारते हुए देखना ले।

Kid story in hindi | success kid story in hindi


 मोहन और कमल दोनों कबूतर को लेकर चले जाते हैं। मोहन सोचता है मैं कबूतर को लेकर गुफा में जाता हूं। वहां पर मुझे कोई नहीं देखेगा। मोहन गुफा में चला जाता है। गुफा में कोई भी नहीं होता और मोहन कबूतर की गर्दन मरोड़ देता है और उसे मार देता है। 
फिर मोहन मरे हुए कबूतर को लेकर गुरुजी के पास चला जाता है और गुरुजी को कहता है देखिए गुरु जी मैंने इस कबूतर को मार दिया है। अब तो मैं इस परीक्षा में सफल हूं और क्या मैं अपने घर जा सकता हूं।

तब गुरु जी कहते हैं पहले तुम कमल को आने दो मैं परीक्षा का परिणाम दोनों को इकट्ठा ही बताऊंगा।
शाम हो जाती है चारों तरफ अंधेरा छा जाता हैं। लेकिन कमल अभी तक वापस नहीं आता यह सोचकर गुरु जी को भी चिंता हो रही होती है। कि कमल अभी तक कहां रह गया।

Kids stories | moral stories for children's in hindi

तब थोड़ी देर बाद दूर से गुरुजी कमल को आते हुए देखते हैं और मोहन को कहते हैं देखो कमल आ गया।
लेकिन कमल ने कबूतर को नहीं मारा होता कबूतर अभी भी जीवित था।
"गुरुजी ने कमल से कहा"
तुमने इस कबूतर को क्यों नहीं मारा तो कमल ने उत्तर दिया गुरु जी यह बहुत लंबी कहानी है। मैं आपकी परीक्षा में  सफल नही हो गया हूं। मुझे अभी ओर शिक्षा की जरूरत है।
गुरुजी कमल से कहते हैं जब तक तुम मुझे पूरी बात नहीं बताओगे तब तक मैं तुम्हें आश्रम में एक कदम नहीं रखने दूंगा।
तब कमल बहुत प्यारा सा उत्तर देता है।
कमल कहता है। मैं इस कबूतर को मारने के लिए जंगल में गया। लेकिन जंगल में सारे पक्षी मुझे देख रहे थे। तो मैं इस कबूतर को मारने के लिए थोड़ी और आगे गया। वहां पर कोई पक्षी तो नहीं था। 
लेकिन वहां पर पेड़ मुझे देख रहे थे। फिर मैं पहाड़ी पर गया पहाड़ी पर सन्नाटा मुझे देख रहा था। फिर कबूतर को मारने के लिए मैं गुफा में गया तो वहां पर अंधेरा मुझे देख रहा था। मैं जहां भी जाता कोई ना कोई चीज मुझे देख रही थी। यहां तक कि मैं खुद कबूतर को मरते हुए देख रहा था। कमल गुरुजी से कहता है। मैं इस परीक्षा में असफल हो गया।

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Kid story in hindi



गुरुजी की सिखाई शिक्षा | Hindi kids stories | story for kids in hindi


तब गुरु जी कहते हैं।
 पुत्र तुम इस परीक्षा में सफल हो गए हो मैं तो यही देखना चाहता था। कि तुम इस कबूतर को मारते हो या नहीं। मैं तुम्हें यही समझाना चाहता था।
तुमने इस कबूतर को इसलिए नहीं मारा क्योंकि कोई देख रहा था। बल्कि तुम्हें डर था। कि कोई तुम्हें इस कबूतर को मारते हुए देखना ले। मैं यही कहना चाहता हूं। 
की अगर कोई बुरा काम करता है तो उसके मन में डर होना चाहिए। कि उसे कोई ना कोई देख रहा है तो वह बुरा काम करेगा ही नहीं मैं तुम्हें यही समझाना चाहता था और तुम इस में सफल हुए कमल। 
तुम अपने घर जा सकते हो। यह सुनकर कमल बहुत खुश हुआ और अपने घर चला गया।
मोहन चुपचाप वापस आश्रम में चला गया उसे अभी और शिक्षा की जरूरत थी।


Moral of kid story in hindi 

  इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कुछ भी बुरा करने से पहले 10 बार सोचना चाहिए।

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