गरीब बच्चा बना IAS| Motivational story

गरीब बच्चा बना IAS| Motivational story

कुछ किरदार होते हैं। जो हमें मोटिवेट तो करते ही हैं पर वह हमारे दिल में ऐसे बस जाते हैं। कि हम उन्हें भूल ही नहीं पाते ऐसा ही एक किरदार है।

 शिव का। बिखरे-बिखरे बाल थे। उसके चेहरे पर एक स्माइल थी। कुछ भी नहीं था। उसके पास फिर भी उसके चेहरे पर बिल्कुल भी दुख नजर नहीं आता था। सभी उसको शिव के नाम से पुकारते थे। उसका पूरा नाम था। शिव प्रकाश शायद बहुत कम ही लोग उसको पूरे नाम से ही जानते थे। शिव 9 साल का था और एक कचोरी की दुकान पर थोड़ा बहुत काम भी कर लिया करता था और उसे कुछ पैसे भी मिल जाया करते थे। शिव के माता पिता एक छोटे से कारखाने में काम किया करते थे। जब शिव 5 साल का था। तब वह आए थे यहां पर रोजगार की तलाश में 2 साल बाद शिव के पिता के कारखाने में काम करते करते हाथ कट गए और जो सारी जमा पूंजी थी। वह सारी इलाज में लग गए। वह गरीब हो गए थे। इसके बाद उसकी मां काम पर जाने लगी और शिव भी उधर-उधर हाथ मारने लगा इसके बावजूद वह पढ़ता भी था। पास के एक सरकारी स्कूल में  से आने के बाद और थोड़ा बहुत काम भी कर लिया करता था। जिससे उसका गुजारा चल जाता था।

गरीबी के बावजूद भी पढ़ाई रखी चालू

शिव जितना मासूम था उतना तेज भी था। जब वह दुकान पर खाली रहता तो पढ़ी हुई रिद्धि की किताबों को पढ़ने लग जाता था। शिव की टीचर भी हैरान थी की पढ़ाई को ज्यादा ना समय देने के कारण भी शिव पढ़ाई में इतना तेज कैसे है।
 एक तो शिव की मासूमियत और उसके हुनर होने के कारण शिव की टीचर को भी उससे लगाव हो गया था। उसकी टीचर उसके घर पर आया जाया करती थी और लगाव होने का यह कारण भी था। कि उसकी टीचर की कोई संतान नहीं थी। शिव दुकान पर अधिक किताबों को पढ़ने लगा था और उसे पढ़ने में बहुत मजा भी आता था। लेकिन जैसे-जैसे उसको पढ़ने में और मन लगने लगा तो उसके पास किताबों की कमी हो गई थी। और शिव के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह किताबें खरीद सके।
शिव के घर से थोड़ी दूर पर एक रद्दी का गुदाम था। और शिव रात में मौका देखकर रद्दी के गोदाम में चला जाता था और वहां से किताबें चोरी कर आ जाता था। यह सिलसिला लगातार चलता रहा। शिव आठवीं क्लास तक पहुंच गया। फिर मोहल्ले के कुछ नशेड़ी लोग भी उसी के गोदाम में चोरी करने लगे। एक दिन यह खबर गोदाम के मालिक को पता लग गई। तो उसने रात को जाकर चेक करना चाहा जब वह चेक करने गया तो उसे वहां पर शिव मिला। तो गोदाम के मालिक ने सारा इल्जाम शिव पर ही डाल दिया और उसे बाल सुधार केंद्र भेज दिया गया। जब यह बात शिव की टीचर को पता चली। तो शिव की टीचर बहुत हैरान थी। कि उसके माता-पिता शिव के टैलेंट को समझ नहीं पाए और उसे ही चोर मानकर उससे मिलने भी नहीं जाते।
 IAS Motivational story
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टीचर ने करी सहायता

 तब शिव की टीचर ने सारी बात जाकर उसके माता-पिता को बताएं। शिव के पिता तो अपाहिज थे। लेकिन उसकी मां सारी बात समझ चुकी थी और शिव की टीचर भी शिव को छुड़ाने के लिए मदद कर रही थी। उसकी टीचर ने अपने संबंधित वकीलों से बात की। किसी ना किसी तरह शिव को वहां से छुड़ा लाया गया था। लेकिन जब शिव वापस आया तो खुश नहीं था। उसे बार-बार अपना चोरी पर लगा इल्जाम याद आता था। सभी लोग अपने बच्चों को व उदाहरण देखकर समझाने लगे कि तुम्हें शिव जैसा बिल्कुल नहीं बनना। यह बात उसके दिल को लग गई थी। और शिव ने तब सोच लिया कि अब कुछ ऐसा करना है कि वह समाज के लिए एक अच्छा उदाहरण बने। उसने अपने माता-पिता से कहा कि वह आगे पढ़ना चाहता है। तो उसके माता-पिता ने कहा कि अभी हमारी आर्थिक स्थिति ठिक नहीं है कि तुम्हें हम पढ़ा सकें यह सुनकर शिव पूरी तरह टूट गया और शिव ने फिर पढ़ाई छोड़ कर काम करने का मन बना लिया। जब वह स्कूल अपना सर्टिफिकेट लेने गया तब शिव ने अपनी सारी बात टीचर को बताई। यह बात सुनकर शिव के टीचर की आंखों से आंसू आ गए। फिर शिव की टीचर ने सारी बात कर जाकर अपने पति को पताई। जो कि एक प्रोफेसर लगे हुए थे। उन्हें शिव के बारे में सब बताया कि वह कितना होनहार है। लेकिन आर्थिक स्थिति की वजह से वह अपनी पढ़ाई आगे नहीं कर पा रहा। टीचर का पति समझ गया था कि वह क्या कहना चाहती है। तो उसके पति ने उसे कहा कि तुम शिव को जितना पढ़ाना चाहती हो पढ़ाओ। जितनी मदद करना चाहती है करो अगर तुम्हें खुशी मिलती है तो मुझे भी कोई दिक्कत नहीं। यह सुनकर शिव के टीचर खुश होगी और अगले दिन स्कूल जाने का इंतजार करने लगी।

टीचर ने उठाया खर्चा

 अगले दिन जब सुबह हुई तो शिव की टीचर स्कूल जाने से पहले शिव की झोपड़ी में गई। जब उसे पता लगा कि शिव काम के लिए निकल गया है।तो यह सुनकर बड़ी दुखी हुई और उसने अपनी सारी बात उसकी माता को बताई और जब यह बात शिव को पता चली तो। शिव भी यह सुनकर बहुत खुश भी हुआ और दुखी भी। दुखी तो वह इसलिए हुआ क्योंकि अगर वह सारा दिन पढ़ाई करेगा। तो उसके घर की आर्थिक स्थिति इतनी नहीं है कि उसकी मां के काम करने से घर का गुजारा चले। फिर अगले दिन शिव ने सारी बात अपनी टीचर को बताई फ्री टीचर ने कुछ देर तक अपने पति से बात करी और शिव को कहा कि वह तुम्हारे साथ साथ तुम्हारे परिवार का खर्चा भी उठाने को तैयार है।
शिव की टीचर ऐसा इसलिए कर रही थी। क्योंकि उसके टीचर की कोई संतान नहीं थी और वह किसी का सपना पूरा करना चाहती थी। फिर टीचर ने शिव के माता को अपने घर पर सफाई करने का काम पे रख लिया। और उसके पिता की सेवा भी करने लगे। अब शिव के पास सारी सुख सुविधाएं थी। जिस तरह की वह पढ़ाई करना चाहता था। वह सारी किताबें थी शिव की टीचर ने उसका दाखिला बोर्डिंग स्कूल में करवा दिया ताकि वह अपने परिवार को बार-बार देखकर अपने मार्ग से नाम भटके।

गरीब बच्चा बना IAS

 शिव फिर 3 महीने में एक बार घर पर आता था। ऐसे करते-करते उसकी 12वी भी पास हो गई और 12वीं में उसने डिस्टिक लेवल पर टॉप करा। आगे की पढ़ाई करने के लिए वह दिल्ली चला गया। graduation की पढ़ाई करने के लिए और साथ-साथ में IAS की तैयारी भी कर रहा था। जब उसने IAS का पेपर दिया। तो एक ही बारी में उसकी अच्छी रैंक आ गई और उसे  IAS officer की नौकरी मिल गई। उसने अपनी टीचर माता-पिता और अपने परिवार का नाम रोशन कर दिया। जिसको कभी चोरी के नाम से जाना चाहता था। आज वह बहुत बड़ा IAS है।

For motivation

 शिव की तरह काफी सारे बच्चे हैं। जो अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। लेकिन उनके पास पढ़ाई के लिए पैसे नहीं है या उनकी आर्थिक स्थिति सही नहीं हैं। और ऐसे ही कई बच्चे अपने सपनों को पूरा करने की बजाय उन्हें दबा देते हैं।
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