जादुई घड़ी का कमाल | Kids story in hindi- baccho ki khaani

जादुई घड़ी का कमाल

Kid story hindi | best baccho ki khaani

मोहन एक आलसी बच्चा है मैं हमेशा लेट हो जाता है मैं हमेशा स्कूल भी लेट पहुंचता है इस वजह से उसको स्कूल में भी डांट पड़ती है।
मोहन:- May I come in teacher
टीचर:- मोहन आज तुम फिर लेट हो गए जाओ कान पकड़ो और क्लास के बाहर खड़े हो जाओ।
 मोहन:- सॉरी मैम आज उठने में लेट हो गया।
टीचर:- हर बार यह बहाना नहीं चलेगा तुम एक अलार्म वाली घड़ी ले लो और बाहर खड़े रहो।
मोहन:- सॉरी मैम मैं आज अलार्म वाली घड़ी ले लेता हूं।
स्कूल खत्म होने के बाद मोहन घड़ी की दुकान पर जाता है।
सेल में एक घड़ियां पड़ी होती है उस घड़ी में से मोहन को एक घड़ी पसंद आ जाती है जगमोहन उस घड़ी को पकड़ता है तो वह घड़ी बोलने लगती है मोहन पहले तो डर जाता है फिर घड़ी उसे कहती है तुम मुझे ले लो मुझे कोई पसंद नहीं करता।
तो मोहन उसे कहता है मैं तुम्हें तभी लूंगा जब तुम मेरा सारा काम करवाओ गी मैं हमेशा स्कूल जाते टाइम लेट हो जाता हूं क्या तुम मुझे टाइम पर उठा दोगी।

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जादुई घड़ी का कमाल | Kids story in hindi- baccho ki khaani
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घड़ी कहती है मैं तुम्हारा सारा काम करवा दूंगी तुम मुझे खरीद लो। मोहन गाड़ी को दुकानदार से खरीद लेता है और घर चला जाता है। मोहन घर जाकर अपने माता-पिता को घड़ी दिखाता है और जोर-जोर से कूदने लग जाता है।
मोहन:- मामा देखो मैं नवी अलार्म घड़ी लाया हूं अब मैं स्कूल के लिए कभी लेट नहीं होऊँगा।
माँ:- बेटा तुम हमारे उठाने पर तो उठता नहीं इस घड़ी के आवाज से क्या उठेगा।
रात हो जाती है मोहन अपने कमरे में सोने के लिए चला जाता है। 7:00 बजे का अलार्म लगा देता है। रात को घड़ी सोचती है कि मोहन इतनी अच्छी नींद में सो रहा है तो मैं इसे उठाती नहीं मैं अलार्म 7:00 की वजह 9:00 बजे का कर देती हूं। जब सुबह मोहन की नींद खुलती है और वह समय देखता है तो वह डर जाता है कि आज मैसेज लेट हो गया आज टीचर फिर मुझे डांट पड़ेगी।
 यह घड़ी बिल्कुल बेकार है इसने मुझे उठाया नहीं मैं इस गाड़ी को भी बाहर फेंक देता हूं।
उसी वक्त घड़ी में से आवाज आती है घड़ी बोलती है मुझे बाहर मत फेंको मैंने तो तुम्हारी भलाई के लिए जरा तुम इतनी अच्छी नींद में सो रही थी मैं तुम्हें जगाना नहीं चाहती थी।
मोहन घड़ी से:- लेकिन मैं स्कूल के लिए तो लेट हो गया।
तब घड़ी मोहन को कहती है अगर तुम चाहो तो मैं समय को रोक सकती हूं तुम आराम से तैयार हो जब तक तुम तैयार नहीं होंगे मैं तब तक समय को रोक के रखूंगी।
घड़ी से पूछता है क्या ऐसा हो सकता है। दो घड़ी कहती है हां बिल्कुल ऐसा हो सकता है मैं ऐसा कर सकती हूं।
सुनकर मन खुश हो जाता है और स्कूल के लिए तैयार होने के लिए चला जाता है। जब मोहन स्कूल में पढ़ता है और समय देखता है तो सिर्फ 9:30 ही हुआ होता है और स्कूल का टाइम 10:00 बजे का होता है मोहन आधा घंटा पहले ही स्कूल पहुंच जाता है।

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10:00 बजे आती है टीचर क्लास में आती है और मोहन की तारीफ करती है कि आज तक मोहन सही टाइम पर नहीं आया लेकिन आज मोहन सबसे पहले आ गया मोहन का स्कूल में बहुत अच्छा दिन गुजरता है। फिर मोहन वापस घर आ जाता है।
रात का समय
रात हो जाती है खाने का टाइम होता है अब मोहन गेम खेल रहा होता है मोहन घड़ी से कहता है कि मैं गेम के फाइनल स्टेज पर हूं और अभी मॉम डैड मुझे खाने के लिए नीचे बुला लेंगे तुम प्लीज कुछ करो तब घड़ी कहती है तुम चिंता मत करो मैं टाइम को रोक देती हूं तुम आराम से गेम खेलो। जादुई घड़ी अपनी शक्ति से टाइम को रोक देती है और मोहन अपनी गेम पूरी करता है।
जादुई घड़ी मोहन से कहती है कि जो हम कर रहे हैं यह ठीक नहीं है तो मोहन से कहता है तुम देखो ना मैं कितना खुश हूं सभी काम ठीक हो रहे हैं बस तुम मेरा ऐसे ही साथ देती रहो।
ऐसे ही कुछ दिन निकल जाते हैं मोहन अपनी मर्जी से उठता है बैठता है जब उसकी मन करता है वह जादुई घड़ी से टाइम को रोक देता है या आगे पीछे करता रहता है।
1 दिन मोहन बाहर जाता है टाइम हो रहा होता है 1:00 बजे का पर मोहन अपनी जादुई घड़ी से टाइम सुबह 9:00 बजे का कर देता है। उसी वक्त मोहन के पिता को हार्ट अटैक आ जाता है मोहन की मां अपने पति को हॉस्पिटल में लेकर जाती है लेकिन हस्पताल में कोई भी डॉक्टर नहीं होता क्योंकि इतनी सुबह सुबह अस्पताल में कोई भी डॉक्टर नहीं था तब मोहन की मां मोहन को फोन करती है और कहती है फटाफट अस्पताल आ जाओ मोहन फटाफट अस्पताल चला जाता है वहां पर अपने पिता की हालत देखकर वह रोने लगता है।
फिर मैंने अपनी जादुई घड़ी से पूछता है कि 1:00 बज रही है अभी तक कोई डॉक्टर क्यों नहीं आया तब जादुई घड़ी कहती है कि तुमने ही तो कहा था सुबह के 9:00 बजा दो तो मैंने अपनी शक्तियों से सुबह के 9:00 बजे दिए।
मोहन घड़ी से कहता है कि जैसे टाइम था तुम वैसा ही कर दो और मेरे पिता को बचा लो जादुई घड़ी वैसे ही कर देती है जैसा मोहन कहता है दोपहर के 1:00 बजे का टाइम ही हो जाता है और फटाफट डॉक्टर अपने घर से वापस अस्पताल आते हैं। मोहन के पिता का इलाज करते हैं।
 डॉक्टर कहते हैं अगर 10 मिनट भी लेट हो जाते तो तुम्हारे पापा नहीं बच पाते यह सुनकर मोहन घबरा जाता है और घड़ी को कहता है कि आज के बाद में कभी भी टाइम के साथ छेड़खानी नहीं करूंगा मैं हमेशा टाइम के साथ ही चलूंगा और अपना काम टाइम पर ही करूंगा।
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