सोसाइटी का भूत | Real horror story

          Real horror story

मेरा नाम सुनील है। आज मैं 20 साल का हूं। मैं आपको अपनी बचपन की एक असली कहानी सुनाना चाहता हूं। बात उस समय की है जब मैं 5 साल का था। हमारी जॉइंट फैमिली थी। हम सभी एक ही घर में रहते थे। हमें एक घर में रहने में दिक्कत होती थी। तो जो हमारे पड़ोस में रहते थे। उनकी बीवी की मौत होने के बाद वह घर बेच कर चले गए। तो मेरे पापा में वह घर खरीद लिया और हम उसी घर में रहना शुरू कर दिया। फिर एक दिन जो हमारे पड़ोस में ऑन्टी रहती थी। जो आंटी प्रेग्नेंट थी।

कुछ समय बाद

 एक दिन उनके अचानक मृत्यु हो गई। जब होने डॉक्टर के पास ले गए तो डॉक्टर ने कहा इन्होंने कोई गलत चीज खा ली है। जिनकी वजह से इनकी मृत्यु हो गई है। उस मृत्यु के बाद रात को हमारी कॉलोनी में जोर-जोर से रोने की आवाज आने लग गई। हमे लगता था कि कोई बिल्ली या कुत्ता कर रहा है। धीरे-धीरे जैसे टाइम बीत रहा था। वैसे वैसे हर रात अपाजे भी बड़ती जा रही थी। ऐसा लगता था रात को कोई अपने दुख में बहुत जोर जोर से रो रहा है। हमें बहुत डर लग रहा मैं और मेरी मम्मी हमेशा अपने कानों में रुई डाल कर सो जाते थे। ताकि आवाजें सुनाई ना दे फिर कुछ दिनों बाद जिस घर में उस औरत की मृत्यु हुई थी। वह अपना घर छोड़कर चले गए। तो उनकी जगह एक हस्बैंड वाइफ आ गए।
सोसाइटी का भूत | Real horror story
Horror story


2 महीने बाद

 ऐसे ही 2 महीने बीत गए हमारे नए में पड़ोसी आए थे। हमारी उनसे बातचीत होनी शुरू हो गई। हम एक दूसरे के घर जाया करते थे। फिर कुछ दिनों बाद हमारे नए पड़ोसी जो आए थे। उनकी वाइफ भी प्रेग्नेंट हो गई 9 महीने तो ऐसे ही बीत गए जब उनका बच्चा होने वाला था। तो उनकी भी मृत्यु हो गई। हम सब बड़े घबराए हुए थे। यह क्या हो रहा है हमारी सोसाइटी में जो भी प्रेग्नेंट होती है। उसकी यहां तो मृत्यु हो जाती है या उसका बच्चा मर जाता है।

अमरूद का पेड

फिर मैं और मेरे दोस्त हमारे घर के पीछे एक अमरूद का पेड़ था। उधर अमरूद तोड़ने के लिए गए मैं और मेरा एक दोस्त तो पेड़ पर चढ़े गए। अमरूद तोड़ने के लिए और मेरा दूसरा दोस्त नीचे ही खड़ा हुआ था। हमारा ध्यान तो अमरूद तोड़ने में था। मेरे दूसरे दोस्त कि एकदम से चीखने की आवाज आई और जब मैंने पीछे मुड़ कर देखा तू मेरे दोस्त के सर में से खून निकल रहा था। मैं फटाफट घर पर गया और घर पर अपनी मम्मी को सब बताया। मेरी मम्मी ने एंबुलेंस का फोन करा। एंबुलेंस घर पर आई और मेरे दोस्त को हॉस्पिटल ले गए। उधर से मेरी मम्मी ने मेरे दोस्त के parents को भी फोन कर दिया था। हमारी सोसाइटी में कुछ ना कुछ हुए जा रहे था। रोज रात को आवाजें भी आती थी। फिर कुछ दिन बाद मेरा दोस्त ठीक हो कर आ गया तो। मैं उसके घर गया मैंने अपने दोस्त से पूछा कि तुम्हें चोट कैसे लगी। तो मेरे दोस्त ने मुझे बताया कि जब तुम अमरूद तोड़ रहे थे। मुझे ऐसा लगा कि किसी ने मेरे को पीछे से पकड़कर खींचा। खींच कर दूर ले गया फिर मेरा सर ईट पर लग गया। मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो कोई नहीं था। यह सुनकर मुझे बहुत डर लगा और मैं फटाफट अपने घर आ गया। यह सब कुछ मैंने अपनी मम्मी को बताया तो मेरी मम्मी भी डर गई। फिर हम सब सोसाइटी वालों ने इन सब की मौत के कारण जानने के लिए सोसाइटी में हवन करवाया पर उससे भी कुछ नहीं हुआ।

पागल का सोसाइटी मैं आना

 फिर कुछ दिनों बाद हमारी सोसाइटी के बाद एक पागल बुड्ढा जोर जोर से चीख रहा था। सब मरोगे वो किसी को नहीं छोड़ेगी यह सुनकर हमारे सोसाइटी वाले डर गए। फिर सारी सोसाइटी वालों ने मौत का कारण जानने के लिए एक बाबा को बुलाया जैसे ही बाबा अंदर आए। एकदम हवा का झोंका आया। और बहुत तेज हवाएं चलने लग गई अब तक बाबा ने सारी जगहों को देखा और एक जगह पर अपनी आंखें बंद करके बैठ गए कुछ देर बाद बाबा ने आंख खुली। तो बाबा ने बताया इस सोसाइटी में एक औरत का साया है। उस औरत का जिसका बच्चा होने वाला था और उससे बच्चे समेत मार दिया था। उसी की आत्मा उन सभी औरतों को मार रही है जो पेट से हैं। यह सुनकर सारे डर गए।

बाबा की मौत

 सभी बाबा से कहने लगे इसका कोई इलाज है। धूम बाबा ने कहा इसका सिर्फ एक ही इलाज है। हमें किस तरह उस औरत की आत्मा को बुलाना होगा और उससे पूछना होगा तुम सभी को क्यों मार रही हो। आत्मा का नाम सुनते ही सारे लोग डर गए और बाबा के पांव पकड़ने लगे बोलने लगे बाबा कुछ भी करके हमें इस से छुटकारा दिलाओ। बाबा ने बोला कल अमावस्या की रात है। कल अमावस्या की रात को मैं तुम्हारी उस सोसाइटी में हवन करूंगा और उस आत्मा को बुलाऊंगा चिंतित मत हो।
अमावस्या की रात वाला दिन।
शाम के टाइम बाबा आपने हवन का सामान लेकर हमारी सोसाइटी के पार्क में जाकर बैठ गए और हवन करना स्टार्ट कर दिया। हवन करते करते जोर से आवाज आने लग गई हंसने की हा....हा... हा.... हा
... सारे सोसाइटी वाले डर गए।
तो बाबा ने चिक कर कहा कि तुम क्या चाहती हो
क्यों मार रही हो इन सब को  इन्होंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है। तो एकदम आवाज आई। मैं सबको मार दूंगी यह कहते ही एक बड़ी तेज हवा चने लग गई और एक बड़ा सा पत्थर उड़ते हुए बाबा के सर में जाकर लग गया और बाबा की वहीं पर मौत हो गई।

आज भी सोसाइटी मैं भूत का साया

यह देखकर सारी सोसाइटी वाले डर गए और फटाफट अपने घर में भाग गए। जैसे ही सुबह हुई सारो ने अपना सामान पैक करा और सारे उस  सोसाइटी को छोड़कर जा रहे थे। हमें भी उस सोसाइटी में रहने से डर लग रहा था। तो हमने भी अपना सामान लेकर उठाया और हम भी सोसाइटी को छोड़ कर आ गए। आज उस सोसाइटी में कोई नहीं रहता। वह बिल्कुल खंडार बनी हुई है और जो भी सोसाइटी के आसपास घूमता है उसकी मौत हो जाती है। जब भी मुझे बाबा की मौत वाला दिन याद आता है तो मेरे रोनटे कांप उठते हैं। आज भी उस औरत की आवाज कई भर मेरे कानों में गूंजती है।

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